Project Disha – APF Poem

माँ की ममता

घुटनों से रेंगते-रेंगते
कब पैरों पर खड़ी हुई
तेरी ममता की छांव में
जाने मैं कब बड़ी हो गई

काला टीका दूध मलाई
आज भी सब कुछ वैसा है
मैं ही मैं हूं हर जगह
प्यार ये तेरा कैसा है

‘अफवाहों से जन्मी ये’

सही करो फिर भी दुनिया क्यों देती है मुझको ये इल्जाम
नजरिया गलत तो दुनिया का है, मैं क्यों छोड़ दूं अपना काम।।

अफवाहे-ताने सुनते हुए भी, मै नहीं रुकी चलते चलते,
अफवाहों से जन्मी ये आग भी, अब थक गई जलते-जलते।।

बाधा डालना दुनिया का काम, मै करुंगी वही जो मन चाहे, दुनिया वालों ये मेरी किसमत ले जाएगी वही जहां है।।